नीमच लोग समझते हैं की नीमच नगर पालिका की पूर्व अध्यक्ष के पति हरीश दुआ नीमच शहर के लिए मीनाक्षी मैडम का चुनाव प्रबंधक मनोनीत हो गये है और उसने अपने स्तर पर काम शुरू भी कर दिया है. पर वह काम कैसे कर रहे है इसको लेकर लोगों में और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में चर्चा बन रही है.
बीते दिनों मीनाक्षी मैडम के शहर में कुछ सामाजिक संस्थाओं में रूबरू संवाद के कार्यक्रम हुए थे. जो हो गए उनके बारे में तो सबको पता है पर जो नहीं हो पाए वह वह चौकाने वाले बन पड़े हैं. इससे यह पता चलता है की हरीश दुआ शहर में मैडम की साख जमाने में लगे है या उनकी साख पर पलीता लगाने की कोशिशों में जुटे है.
उस दिन राजस्व कॉलोनी में वहां के निवासियों का एक सामूहिक भोज का आयोजन था. हरिश भी राजस्व कॉलोनी के निवासी होकर उस आयोजन में भागीदार थे. आयोजन के लिए मीनाक्षी मैडम को सीधे आयोजकों की ओर से कोई निमंत्रण नहीं दिया गया था. पर हरीश दुआ वहां के संघ परिवार की भारत विकास परिषद से जुड़े अपने मित्र अशोक अग्रवाल के मार्फत इस कोशिश में थे की मीनाक्षी मैडम को भी इस आयोजन में निमंत्रित किया जाए. पर कट्टर संघी अशोक अग्रवाल ने न केवल उन्हें निमंत्रण देने से परहेज जताया बल्कि यह कहकर रायता फैलाने का काम भी कर डाला की सामाजिक कार्यक्रम में मीनाक्षी मैडम की क्या आवश्यकता है. बुलाना ही है तो फिर दिलीप परिहार विधायक और भाजपा के उम्मीदवार सांसद सुधीर गुप्ता को भी बुलाया जाना चाहिए. फिर जब विवाद बढ गया तो मीनाक्षी मैडम को निमंत्रण देने से ही परेज पा लिया गया.
ऐसा ही खेल उसी दिन बघाना में अग्रवाल समाज के आयोजन में भी खेलने का काम हरिश ने किया. वहा भी समाज का भोज था. वहां भी हरिश आयोजकों के चैट गये और कहने लगे मीनाक्षी मैडम को इस आयोजन में बुलाओ. भाजपा से जुड़े लोगों ने दो टूक शब्दों में हरिश को हडका कर भगा दिया. कहा यह सामाजिक आयोजन है कोई राजनीति का अखाड़ा नहीं है. दोनों कार्यक्रमों में मीनाक्षी मैडम की उपस्थिति होने और ना होने की खबरें जमकर शहर में लोगों में चर्चा का विषय बनी है. राजस्व कॉलोनी में तो हरिश ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए कांग्रेसी परिवार से जुड़े एक दवा की दुकान के संचालक पर असहयोग करने का आरोप चस्पा कर दिया और कह दिया मैं तो बुलाना चाह रहा था पर उस दवा वाले ने भाटा भड़क दिया. अब कार्यकर्ता कह रहे हैं की मीनाक्षी मैडम को कौन समझाए की निमंत्रण मिलने पर आयोजनों में शरीक होते हैं, यह थोडे़ होता है की हमारे कार्यकर्ता आयोजकों से यह गुहार करने जाएं की इसमें हमारी मैडम को भी बुलाओ. अब न बुलाया गया तो भद्द किसकी पीटी है. मीनाक्षी मैडम की या हरीश की. हरीश तो पल्ला झाड़ कर अलग खड़े हो गये पर मीनाक्षी मैडम को तो यह भी पता नहीं है की उनके नाम से किसी ने आयोजकों से उनके लिए निमंत्रण की गुहार भी लगाई थी और आयोजकों ने उस गुहार को ठुकरा भी दिया.
चलते चुनाव में ऐसे हालात निश्चित ही मीनाक्षी मैडम के लिए नुकसानदेह बन रहे हैं. भले ही उसमें उनका कसूर नहीं है पर हरीश तो रायता ढोलने में जुटता दिख रहा है. भगवान बचाए मीनाक्षीजी को और कांग्रेस को और भगवान बचाए कांग्रेस को हरिश से भी.
मीनाक्षी मैडम तो यही समझती है की हरीश के पिता जीवनलालजी अपनी समूची जिंदगी कांग्रेसी बनकर जीयें हैं. पर शायद उन्हें यह पता नहीं है की हरीश कांग्रेस का तो महज चोला ओढता है अंदर से उसकी चड्डी संघ की खाकी है. सब जानते हैं की वह संघ परिवार के गुरु दक्षिणा कार्यक्रम में सालाना एक मोटा लिफाफा भी भेट करता है.
