चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा कहते हैं। इस दिन से हिन्दू नव वर्ष आरंभ होता है। इस बार यह पर्व 6 अप्रैल 2019 को है। गुड़ी का अर्थ है विजय पताका। कहा जाता है कि इसी दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था। इसी दिन से नया संवत्सर भी शुरु होता है। अत: इस तिथि को 'नवसंवत्सर' भी कहते हैं। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का आरंभ भी होता है।
चैत्र ही एक ऐसा महीना है, जिसमें वृक्ष तथा लताएं फलते-फूलते हैं। शुक्ल प्रतिपदा का दिन चंद्रमा की कला का प्रथम दिवस माना जाता है। जीवन का मुख्य आधार वनस्पतियों को सोमरस चंद्रमा ही प्रदान करता है। इसे औषधियों और वनस्पतियों का राजा कहा गया है। इसीलिए इस दिन को वर्ष का आरंभ माना जाता है।
इसके अलावा कहा जाता है कि इसी दिन रामायण काल में भगवान श्री राम ने वानरराज बाली के अत्याचारी शासन से दक्षिण की प्रजा को मुक्ति दिलाई थी। इसके बाद वहां की प्रजा ने अपने घरों में एक विजय पताका फहराई जिसे ही गुड़ी कहा जाता है। यही प्रथा आगे चलकर ‘गुड़ी पड़वा’ के नाम से प्रसिद्ध हुई।
‘गुड़ी पड़वा’ के मौके पर आंध्रप्रदेश में एक विशेष प्रसाद बांटा जाता है। कहते हैं कि निराहार रहकर जो भी व्यक्ति इस प्रसाद का सेवन करता है। वह निरोगी रहता है। इसके अलावा यदि किसी प्रकार का चर्मरोग होता है तो वह भी ठीक हो जाता है।
महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में विशेष रूप से मनाया जाने वाला यह पर्व 9 दिनों तक चलता है। इसका समापन रामनवमी के अवसर पर प्रभु श्रीराम और मां सीता के विवाह से होता है।
महाराष्ट्र में इस दिन पूरन पोली या मीठी रोटी बनाई जाती है। इसमें जो चीजें मिलाई जाती हैं, वे हैं-गुड़, नमक, नीम के फूल, इमली और कच्चा आम। गुड़ मिठास के लिए, नीम के फूल कड़वाहट मिटाने के लिए और इमली व आम जीवन के खट्टे-मीठे स्वाद चखने का प्रतीक होती है।
