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महेश वर्मा महेश वर्मा Author
Title: ट्रैक्टर की लगी दौड़ कोई नहीं कर पा रहा है होड ,सखलेचा के वादे अधूरे समंदर करेंगे पूरे
Author: महेश वर्मा
Rating 5 of 5 Des:
जावद विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय उम्मीदवार समंदर पटेल अपने किसान पुत्र समाजसेवी सेवाभावी और मिलनसार  मधुभाषी व्यवहार के चलते जावद विधा...

जावद विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय उम्मीदवार समंदर पटेल अपने किसान पुत्र समाजसेवी सेवाभावी और मिलनसार  मधुभाषी व्यवहार के चलते जावद विधानसभा क्षेत्र में अपने जनसंपर्क के दौरान आम मतदाताओं की पहली पसंद बनते जा रहे हैं वहीं उनके द्वारा विगत 15 वर्षों में जावद विधानसभा की उपेक्षा कर चुनाव जीतने वाले सखलेचा और अपनी सक्रियता  दिखाने वाले कांग्रेसी उम्मीदवार अहीर निर्दलीय प्रत्याशी पटेल की सफलता को पचा नहीं पा रहे हैं जावद विधानसभा क्षेत्र की ग्राउंड रिपोर्ट को माने तो भाजपा कांग्रेस दोनों प्रत्याक्षी चुनाव में जहां एक नजर आ रहे हैं वह दोनों का मुकाबला मानो समंदर पटेल से ही रह गया है सोशल मीडिया तथा समाचार पत्रों के माध्यम से चुनाव में अब आक्रमक रुख अख्तियार कर चुके समंदर पटेल चुनाव में अपने तीखे सवालों में जनहित के मूल आवश्यकताएं वाले सामाजिक मुद्दों को उठाकर सीधे आम मतदाता व भाजपा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पदाधिकारियों के बीच जा रहे हैं तो वहीं उन्हें जनता भी पलकों पर बिठा रही हैं चुनाव के पहले चरण में ही ऐसा लगता है मानो भाजपा विधायक सखलेचा और कांग्रेसी  उम्मीदवार राजकुमार की पाव तले जमीन कीसकती नजर आ रही हैं चुनाव में जहां कांग्रेस को भाजपा के विधायक  सखलेचा से उनके 15 वर्षीय कार्यकाल में किए गए कार्यों और जावद विधानसभा क्षेत्र को रसातल में पहुंचाने के बावजूद भी एक बार भी भाजपा प्रत्याशी को कई सीधे तौर पर सवाल नहीं कर रहा है जबकि समंदर पटेल ने अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए झूठे विकास कार्यों और हजारों करोड़ की बातें करने वाले भाजपा विधायक को इस तरीके से घेर लिया है कि वह गांव में जनसंपर्क के दौरान उनके उठाए गए सवालों का जवाब तक नहीं दे पा रहा है मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ताबड़तोड़ बुलवाकर आमसभा करवाना या कैलाश विजयवर्गी जैसे कद्दावर भाजपा नेता को बुलाना भी उनकी हताशा का पर्याय है वहीं दूसरी ओर राजकुमार अहीर ने हाँलीवूड में असफल होकर राजनीति के क्षेत्र में अपने लटके झटके दिखाने की कोशिश करने वाली फिल्मी हीरोइन नगमा को बुलाकर रोड शो तो करवा लिया लेकिन हीरोइन को देखते ही देखने के लिए आई भीड़ में यह चर्चा चलती रही कि वह खुद फिल्मों में अपना काम नहीं बना पाई अब इसे लाकर कांग्रेसी प्रत्याशी अहिर कहां पहुंचे कहना मुश्किल तो भीड़ में यह विचार मंथन भी चलते हुए देखा और सुना गया कि कांग्रेस प्रत्याशी अपनी दबंगई और कानून कायदों को ताक पर रखने के लिए ना सिर्फ जाने जाते हैं बल्कि अपनी ही पार्टी के कैबिनेट मंत्री सहित अन्य सर्वश्रेष्ठ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं पर पत्थर बरसाने सहित लड़ाई झगड़ा करने के आरोपों में से भी गिरे हुए हैं जिसका आक्रोशित के पुराने जमीनी कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में आज भी देखा जा रहा है जिसका खामियाजा भी अहीर को भुगतना होगा तो जन चर्चा तो यह भी हो रही है कि  भले ही भाजपा और कांग्रेसी प्रत्याशी के रूप में सखलेचा और राजकुमार अहीर चुनाव लड़ रहे हैं किंतु भीतर गांत के खतरे को भापकर आंतरिक तौर पर एकमत हो चले हैं सूत्र बताते हैं कि पिछले चुनाव में जब कांग्रेस प्रत्याशी रघुराज जावद क्षेत्र से टिकट दिया गया था पार्टी से बागी होकर राजू सिर्फ कांग्रेस की जड़ों में तेल डाला था बल्कि अपरोक्ष रूप से सखलेचा को जिताने के लिए ही चुनाव लड़ा था जिसकी कीमत को लेकर भी व्यापक चर्चा जावद में चलती रही हैं और क्षेत्र के समर्थक अपनी उपलब्धियों में काम करते हुए खुलेआम करते नजर आ रहे हैं भैया दिल्ली वाला है वह कुछ भी कर सकते हैं चुनाव जीतना उनके लिए एक कला है आर्थिक समीकरण बिठाने में भोपाल के भाई लोगों की सेटिंग जोरदार इन लोगों को आम सुना जाता है हालांकि विगत 15 वर्षों से दलाल संस्कृति को विकसित कर भैया ने जो राजनीतिक क्षेत्र में बिछा रखी हैं इस बार उसके जो सर से कई वजीर प्यादे घोड़े ना सिर्फ गायब हो गए हैं बल्कि अंदरूनी तौर पर सखलेचा को निपटाने के लिए भी कमर कस चुके हैं जिसका सीधा फायदा समंदर पटेल को मिल रहा है विधानसभा का चुनाव इस बदलाव का संकेत दे रहा है बल्कि मत को एक नई राजनीतिक पहचान दिलाने में भी सफल हो सकता है । देखा जाए तो विधानसभा क्षेत्र में कभी भी जातिगत समीकरण या निर्दलीय भारी नहीं रहे गौरतलब है कि जावद विधानसभा क्षेत्र में स्वर्गीय वीरेंद्र कुमार सखलेचा दो बार मुख्यमंत्री रहे पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वे निर्दलीय चुनाव लड़े लेकिन जीत नहीं सके इसके बाद जातिगत समीकरण को आधार बनाकर निर्दलीय भैरुलाल किलोरिया ने भी भाग्य आजमाया लेकिन मुख्य प्रतिद्वंदी भी नहीं बन सके जनता इस क्षेत्र में काम के नाम पर वोट करती हैं और इस बार क्षेत्र में सत्ताधारी दल से जनता बेहद खफा है परिवर्तन चाहती है और दिन पर दिन ट्रैक्टर ने अपनी रफ्तार तेज कर ली हैं ।

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