जावद/ग्वालियर विशेष सत्र न्यायाधीश अर्चना सिंह ने नाबालिग युवती का अपहरण कर अश्लील वीडियो बनाने वाले चार आरोपियों को पांच साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि चार युवकों ने एक नाबालिग का दिनदहाड़े अपहरण किया है। उन्होंने जो अपराध किया है वह क्षमा नहीं किया जा सकता है। अन्यथा समाज में अराजकता को और बढ़ाव मिलेगा। समाज को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है। यदि समाज के लोग अपने दायित्व का निर्वाहन नहीं करते हैं तो उन्हें कड़ा दंड दिया जाना चाहिए। 27 जुलाई 2017 को एक नाबालिग दरगाह पर प्रसाद चढ़ाने गई। वहां पर सौरभ, लालू, विकास, अरुण मिल गए। आरोपियों ने नाबालिग का हाथ पकड़कर कहा कि सोनी का कमरा हमेशा खुला रहता है। हाथ पकड़कर उसे सोनू के कमरे पर ले गए। जहां उसके साथ छेड़खानी की और दोस्तों ने उसका वीडियो बना लिया। घबरा कर वह भागी तो आरोपियों ने धमकी दी कि यह बात किसी को बताई तो उसके माता-पिता की हत्या कर देंगे। जब नाबालिग घर पहुंची तो उसने अपनी बहन पूरी घटना बताई। बहन ने पूरी घटना माता-पिता को बताई। इसके बाद जनकगंज थाने में आवेदन दिया। पुलिस ने अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मामले की जांच कर कोर्ट में चालान पेश किया। आरोपियों ने बचाव में तर्क दिया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। पूर्व से उनका कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इसलिए सजा देने में रहम बरता जाए। कोर्ट ने आरोपियों के कृत्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके अपराध को क्षमा नहीं किया जा सकता है। लालू, सौरव, विकास व अरुण को अलग-अलग धाराओं में 5 व 3 साल की सजा सुनाई। यह सजाएं एक साथ चलेंगी। कोर्ट ने चारों को जेल भेज दिया। चारों पर 4800 रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर एक महीने की सजा और भुगतनी होगी।
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