मनासा । संविधान हमारी विरासत है ,यही हमारी प्रेरणा है यही हमारी ताकत है। हम सभी का प्रयास हो कि हम आर्थिक व सामाजिक लक्ष्यों को पाने के लिए संवैधानिक तरीकों का द्रृड़ता से पालन करें और भाईचारा एकता व सहिष्णुता के मार्ग पर आगे बढ़ें यह बात 'गांधी 150' श्रृंखला के अंतर्गत ग्राम जालिनेर में शासकीय हाई स्कूल के छात्रों के बीच आयोजित संविधान के रास्ते कार्यक्रम में संयोजक महेश नंदवाना ने कही ।
श्री नंदवाना ने कहा कि संविधान भारत की ही तरह विशाल और गहन है यह कोई शैक्षिक कार्य नहीं है हम एक दूसरे से जुड़कर ही संविधान की सूक्ष्मता को चिंतन मनन व विचारों के आदान-प्रदान के जरिए ही संविधान को एक अद्भुत नजरिए से देख पाएंगे इस तरह की चर्चाओं से शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक सामाजिक क्रांति के सपने हम पूर्ण कर पाएंगे।इस अवसर पर छात्रों से चर्चा करते हुए प्रसिद्ध रंगकर्मी व मानवाधिकार आयोग के सदस्य विजय बैरागी ने कहा कि अधिकारों को जानकर समझकर ही उसके प्रति सजग हुआ जा सकता है हमें धार्मिक कट्टरपंथ को भी समझना होगा धार्मिक कट्टरता ने कई सभ्यताओं संस्कृतियों व देशों को खत्म कर दिया है उदार मन व सांझी विरासत के सहारे हम संविधान के मूल्यों को कायम रख पाएंगे। कविता व प्रश्नोत्तर के माध्यम से भीश्री बैरागी ने छात्रों को संविधान से जोड़ा।वरिष्ठ अधिवक्ता गुलाब सिंह चंद्रावत ने छात्रों को आम नागरिकों के अधिकारों की जानकारी देते हुए कहा कि अधिकारों के बोध के साथ दायित्व और कर्तव्यों निर्वहन हमें करना पड़ेगा, साथ ही उन्होंने कहा कि इस विद्यालय में बालिकाओं द्वारा इस कार्यक्रम में ज्यादा भागीदारी बनना इस बात का घोतक है कि अब आधी आबादी पूरा हक प्राप्त करके रहेगी ।अपने उद्बोधन में शिक्षाविद श्याम सालवी ने छात्रों से समाज स्कूल व अन्य सभी जगहों पर एकता के साथ संविधान सम्मत समता मूलक समाज की स्थापना पर बल दिया । आभार जालिनेर संस्था प्रमुख श्यामलाल मालवीय ने माना, इस अवसर पर छात्र-छात्राओ के साथ ही अध्यापक उपस्थित थे।कार्यक्रम संयोजक महेश नंदवाना ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि' गांधी 150' के अंतर्गत देशभर में इस तरह के कार्यक्रम ग्राम सभाओं, शिक्षण संस्थाओं , विशिष्ट वर्गों व अन्य विभागों में चर्चा गोष्टी चिंतन मनन, व प्रतिस्पर्धात्मक प्रतियोगिताओं के रूप में प्रस्तावित है।
