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महेश वर्मा महेश वर्मा Author
Title: जीवन में दुःखो का अंत श्रीमद् भगवत कथा श्रवण से होता है - पं. वैष्णव ...
Author: महेश वर्मा
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नीमच  मित्रता हो तो श्रीकृष्ण सुदाम जैसी हो, प्रेम हो तो श्रीकृष्ण मीरा जैसा हो। जीवन में दुःखो का अंत श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से हो...


नीमच  मित्रता हो तो श्रीकृष्ण सुदाम जैसी हो, प्रेम हो तो श्रीकृष्ण मीरा जैसा हो। जीवन में दुःखो का अंत श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से होता है। आज की नव पीड़ी पाश्चात्य संस्कृति की और अग्रसर है। भारतीय संस्कृति व संस्कारो को जीवित रखने व राम, कृष्ण, प्रहलाद, ध्रुव, रानी लक्ष्मीबाई, भगतसिंह जैसे सन्ताने चाहने वालो को भारतीय ग्रंथो, पुराणों का श्रवण व अनुसरण करना ही होगा। विगत वर्षो के अनुसार वर्तमान समय में भारतीयो का ध्यान पुनः भारतीय संस्कृति व धार्मिकता की और व्यापक स्तर से बढ़ रहा है जो स्वागत योग्य है।
 उक्त विचार कथावाचक पं. श्री ॐ प्रकाश वैष्णव (निलिया वाले) के मुखारबिंद से मनासा विकासखण्ड के अंतिम छोर पर बसे गाँव बख़्तूनि ढाणी ( कंजार्डा) में श्री देवनारायण मन्दिर परिसर में प्रसारित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के आज पंचम दिवस के उपलक्ष में उपस्थित सेंकडो उपस्थित श्रवणकर्ताओ के बिच में रखी गयी। कथा में श्रीमद् भागवत प्रेमियो द्वारा संगीतमय कथा का रसपान सपरिवार उपस्थित होकर किया जा रहा है साथ ही नजदीक के ग्रामीण जन भी उपरोक्त कथा में सपरिवार श्रवण कर रहे है। आज पंचम दिवस की कथा में कथावाचक श्रीमती साधना वैष्णव द्वारा भी लगभग 10 मिनट तक शिक्षा का जीवन में महत्व व दैनिक दिनचर्या पर विस्तार से मार्गदर्शन प्रदान किया।
कथा विगत विगत दिनांक 6 फ़रवरी से संचालित है जो आगामी 12 फ़रवरी तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से सांय 4 बजे तक प्रसारित होगी। आयोजन समिति के सदस्य हरचन्द गुर्जर, गोमा गुर्जर, गोपाल गुर्जर, चन्द्रा गुर्जर, हीरालाल गुर्जर, सुंदरलाल गुर्जर सहित समस्त ग्रामवासियो ने क्षेत्र के भक्तजनो से अपील की है की श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने सपरिवार पधारे साथ ही 12 फ़रवरी को पूर्णाहुति पर आयोजन समिति द्वारा विशाल भण्डारा रखा जा रहा है सपरिवार पधारकर धार्मिक अनुष्ठान को भव्यता प्रदान करे।

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