पूर्व सांसद सुश्री मीनाक्षी नटराजन ने कहा रचनाकारों के लिए इस मिट्टी में है तासीर
मनासा । नगर के वयोवृद्ध शायर व रचनाधर्मी हकीमुद्दीन मंसूरी के कविता संग्रह ' कहत हकीम ' का विमोचन ख्यात लेखिका व पूर्व सांसद सुश्री मीनाक्षी नटराजन ने किया l बसंत पंचमी निराला जयंती व स्व बाल कवि बैरागी के जन्मदिवस पर स्थानीय रचनाकारों की संस्था संकल्प के तत्वावधान में आयोजित इस विमोचन कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों को संबोधित करते हुए मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि आज हकीमुद्दीन मंसूरी जी ने बसंतोत्सव को अपने कविता संग्रह के विमोचन का दिन चुनना ही इस काव्य संग्रह के उद्देश्य को पूर्ण करता है । स्व बाल कवि बैरागी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस माटी में वो तासीर है जो सभी को अपनी रचनात्मकता के लिए प्रेरित करती हैं ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए समाजसेवी व मानवाधिकार आयोग के पूर्व सदस्य भानु भाई दवे ने की कहा कि जीस अवस्था में शारीरिक चेतना साथ छोड़ देती उस समय कविता के साथ साथ चलना निश्चित रूप से हकीमउद्दीन मंसुरी को हम सबसे आगे खड़ा कर देती हैं । कार्यक्रम का संचालन करते हुए रंगकर्मी एवं मानवाधिकार आयोग सदस्य विजय बैरागी ने कहा कि संस्था संकल्प ने हमेशा हर रचनाधर्मी को सहयोग करने का कार्य किया है जो अनवरत चलता रहेगा । श्री बैरागी ने मीनाक्षी नटराजन के नवीन उपन्यास ' अपने अपने कुरुक्षेत्र ' की बात करते हुए उन्हें भी सम्पूर्ण क्षेत्र की तरफ से शुभकामनाएं प्रेषित की । इस अवसर पर नगर के वयोवृद्ध शायर व रचनाधर्मी हकीमउद्दीन मंसूरी का स्वागत गुलाम अब्बास बोहरा, साहित्यकार डॉ पूरण सहगल, अस्तु आचार्य, महेश नंदवाना, ब्रजमोहन समदानी, नरेन्द्र व्यास, कैलाश पाटीदार ने शाल व श्रीफल से किया । मीनाक्षी नटराजन ने भी साहित्य सेवा के लिए हकीमउद्दीन मंसूरी का शाल भेंट कर सम्मान किया । स्थानीय हैप्पी होम स्कूल परिसर में आयोजित इस गरिमामय समारोह में वरिष्ठ अधिवक्ता बंशीलाल धनोतीया, किशोर जवेरीया, कृति संस्था नीमच के अध्यक्ष सत्येन्द्र भाई, ओशो शुन्य के पार के संपादक कमलनयन भट्ट (बाबा), पृथ्वी वर्मा, शिक्षाविद श्याम साल्वी, गुलाम अब्बास बोहरा, सुभाष तुगनावत, उमराव सिंह गुर्जर, चन्द्रशेखर पालीवाल, मंगेश संघई,महेश नंदवाना, गुलाब सिंह चन्द्रावत, सत्यनारायण पाटीदार,राधेश्याम सोनी, संजीव पगारिया, सोनी समाज के अध्यक्ष रमेश सोनी,पत्रकार सलीम कुरैशी, भूपेन्द्र बोहरा जावद,अयूब कबाड़ी, मोहम्मद मंसुरी, पंकज सोनी, महेंद्र उपाध्याय,शकील शेख ,सागर कछावा सहित मनासा के तमाम रचनाकार व साहित्यकार उपस्थित थे ।
