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महेश वर्मा महेश वर्मा Author
Title: मोदी सरकार का मजदूर कर्मचारी विरोधी फैसला, अब मजदूरों का होगा शोषण -भगत वर्मा....
Author: महेश वर्मा
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नीमच राजपत्र में नियत अवधि कामगार की सूचना प्रकाशित होने के बाद अब किसी भी संस्थान में स्थाई कर्मचारीयों की नियुक्ति नहीं हो सकेगी। सर...

नीमच राजपत्र में नियत अवधि कामगार की सूचना प्रकाशित होने के बाद अब किसी भी संस्थान में स्थाई कर्मचारीयों की नियुक्ति नहीं हो सकेगी। सरकार और निजी संस्थानों में नियोक्ताओं द्वारा कर्मचारियों को अवधि के अनुसार दिन, माह, वर्ष के आधार पर नियोजित किया जा सकेगा इस संबंध में वर्तमान केन्द्र की मोदी सरकार ने श्रम कानून बदलने की श्रंखला में आदेश दिनांक 16.03.2018 को भारत के राजपत्रा में प्रकाशित कर दिया है। इस फैसले के विरोध में नीमच जिला मध्यप्रदेश असंगठित कामगार कांगे्रस के जिलाध्यक्ष तथा नीमच जिला इंटक के महामंत्राी भगत वर्मा ने एक बयान जारी करते हुए कहा की इस अधिसूचना के जारी होने के बाद श्रमिक संगठनों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। श्रमिक संगठनों के अनुसार इससे मजदूरों का तथा श्रमिकों का शोषण बढे़गा। अब कोई सरकारी या निजी संस्थान कर्मचारी रखकर काम करवाएगा और उसके बाद उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा उसे सेवा निवृत्ति जैसी कोई सुविधा नहीं मिलेगी न पेंशन मिलेगी और नहीं किसी प्रकार का फण्ड मिलेगा उन्होंने बताया कि केन्द्रीय नियम 1946 के अनुसार पहले लम्बी अवधि तक कार्य करने वाले कर्मचारियों का तीन माह का नोटिस देकर कार्यमुक्त करने वाले कर्मचारियों को तीन माह का वेतन देकर नौकरी से निकालने का प्रावधान था जो औधोगिक विवाद अधिनियम 1947 में पेरा 14 के उपबंधों मेें प्रावधानित था। श्री वर्मा ने बताया कि मोदी सरकार सीधे-सीधे नियोजकों को लाभ पहुंचाना चाहती है। इससे स्पष्ट है कि मोदी सरकार कर्मचारी विराधी सरकार है। प्रकाशित राजपत्रा के अनुसार कर्मचारी ड्यूटी पर पहुंचे तो संस्थान से बाहर जाने का रास्ता दिखाया जासकता है। इसके लिए वह वेतन का हकदार भी नहीं होगा कर्मचारी संगठनों के अनुसार केन्द्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना पूर्णतः कर्मचारी विरोधी है और वह उद्योग जगत को प्रसन्न करने के लिए जारी की गई है। इससे मजदूरों कमचारीयों को सुरक्षित भविष्य की ग्यारंटी नहीं मिलेगी। दिन प्रतिदिन उनका शेषण बढ़ता जाएगा  इससे देश के उद्योगिक ढांचे को भी ठेस लगेगी आने वाले दिनों में मजदूरों के संगठन इस अधिसूचना के खिलाफ संघर्ष की रूप रेखा बना रहे हैं।

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