नीमच अजब मध्य प्रदेश - गजब शिक्षा विभाग, शिक्षा विभाग में कर्मचारियों का पड़ा टोटा, एक पद का वेतन देकर, चार - पांच पदों पर सेवा लेकर किया जा रहा अधिकारियों का शोषण, हकीकत नीमच जिले की, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला कलेक्टर, जिला प्रभारी मंत्री, शिक्षा मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री ध्यान दे ?
नीमच - दुनिया के हर शख्स के जीवन में शिक्षा ही सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। क्योकि बिना शिक्षा के मानव मात्र का जीवन शून्य है । प्राचीन काल से भारत देश में शिक्षा व शिक्षक को सबसे महत्पूर्ण स्थान प्राप्त रहा है । लेकिन इसे विडम्बना कहे या देश का दुर्भाग्य की आज के इस आधुनिक युग में जहाँ संचार की क्रांति व डिजिटल भारत को विकसित करने की आड़ में शिक्षा विभाग में सरेआम चपत लगाई जा रही है; और शिक्षा विभाग व शिक्षक की महत्ता को गर्त में पहुंचाने में सरकार व विभाग के आला अधिकारियो ने कोई कसर नही छोड़ी है ।
देश में मध्य प्रदेश एक अलग ही स्थान अर्जित किये हुए है क्योकि अजब मध्य प्रदेश - गजब शिक्षा विभाग का सूत्र प्राथमिकता से इसी प्रदेश में लागू हो रहा है। नीमच जिले में शिक्षा विभाग में अधिकारियों का पड़ रहा टोटा, रिक्त पदो पर नई नियुक्ति की जगह प्रभार के नाम पर चल रहा खेल । हद तो तब हो गयी की एक ही अधिकारी को मूल पद का वेतन देकर, चार से पांच पदों तक का प्रभार सौंपकर किया जा रहा अधिकारियों का मानसिक शोषण । ऐसी स्थिति में सरेआम हो रहा कर्मचारियों/अधिकारियों के अधिकारों का शोषण, जिले में शिक्षा विभाग का संचालन सबसे ज्यादा प्रभारियों के भरोसे संचालित हो रहा है । ज्ञात रहे जब स्थाई पद पर बंटाढार हो रहा है तो एक व्यक्ति को कई पदो पर प्रभार सौंपकर नीमच जिले के समस्त सरकारी स्कुलों पर ताले लगवाने की मंशा साफ झलक रही है। धरातल पर यह कड़वा सत्य देखने को मिला है। नीमच जिले में चल रहे उपरोक्त प्रभारी पद वो भी वाजिब हो वहाँ तक ठीक है अन्यथा एक व्यक्ति और प्रभार चार पांच से भी अधिक । ऐसे मामलो पर नीमच जिला शिक्षा अधिकारी, नीमच जिला कलेक्टर, नीमच जिला प्रभारी मंत्री, शिक्षा मंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री इस समस्या की और ध्यान केंद्रित करते हुए, ऐसे अधिकारी जिन्हें एक से अधिक पदो का प्रभार सौंपा हुआ है उन्हें त्वरित अन्य पदों से पृथक करते हुए उचित न्याय प्रदान करे । अधिकारी अनुशासन का पालनहार होता है जो कभी अन्याय की पराकाष्ठा तक विरोध नहीं कर सकता है । दोहन होना चाहिए पर शोषण कदापि नहीं, कुछ भी हो पर मानवधिकारों का ध्यान रखते हुए इनको ज़ुल्मों सितम से बचाया जाना चाहिए ।
