*उपचुनाव के बाद प्रदेश से कमलनाथ की विदाई तय!!*
राकेश साहुव वरिष्ठ पत्रकार
धार। मध्यप्रदेश की कांग्रेस पार्टी में दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के बीच तकरार की दर्जनों खबरों के बाद दिग्विजय सिंह ने अपने कुछ मित्र पत्रकारों को बुलाकर ऑफिशल स्टेटमेंट जारी कर दिया है। हालांकि कांग्रेस पार्टी में इसका कोई महत्व नहीं है क्योंकि कमलनाथ ने तो ज्योतिरादित्य सिंधिया के कंधे पर हाथ रख कर फोटो जारी करवाया था।
*कमलनाथ से संबंधों के बारे में दिग्विजय सिंह ने क्या कहा*
दिग्विजय सिंह ने मीडिया में सफाई दी है। दिग्विजय ने कमलनाथ के साथ विवाद की खबरों पर कहा कि कमलनाथ से हमारी दोस्ती 40 साल पुरानी है, ये कभी खत्म नहीं हो सकती है। सारी अफवाहें बीजेपी की तरफ से उड़ाई गई है, हम लोगों के बीच न कोई दरार है और न दरार थी। उपचुनाव में हम सभी सीटें जीतेगें और कमलनाथ ने फिर से मुख्यमंत्री बनेंगें।
*पुत्रों को लिफ्ट कराने के चक्कर में लटक गई कॉन्ग्रेस*
दरअसल दिग्विजय सिंह और कमलनाथ का याराना उनके राजनैतिक उत्तराधिकारी पुत्रों के कारण बिगड़ने की खबरें आई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कमलनाथ दोनों जानते हैं कि मध्यप्रदेश में राजनीति के लिए उनके पास अब ज्यादा समय नहीं है। दोनों जल्दी से जल्दी अपने बेटे को पार्टी के टॉप पर स्थापित करना चाहते हैं। पुत्र प्रेम के इसी चक्कर में कमलनाथ की कैबिनेट का गणित बिगड़ गया था। अब पूरी कांग्रेस आसमान से गिरे खजूर में लटकी दिखाई दे रही है।
*क्या कमलनाथ अब पुनः दिग्विजय सिंह की बात पर भरोसा करेंगे*
कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी उपचुनाव लड़ रही हैं। उम्मीदवार चयन को लेकर कांग्रेस में एकता नहीं है और मामला हाईकमान के पास जायेगा और नेता प्रतिपक्ष चयन को लेकर भी आपसी मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं। फिर कैसी 40 साल की दोस्ती हैं या राजनीतक चाल का षड्यंत्र?
*उपचुनाव के बाद कमलनाथ की स्थिति कैसी होगी!*
उपचुनाव में कांग्रेस कमलनाथ के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही हैं अगर कांग्रेस प्रदेश में हारती है तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी कमलनाथ की होगी और कांग्रेस के कार्यकर्ता कमलनाथ से इस्तीफे की मांग करेंगे। और अगर कांग्रेस पार्टी उपचुनाव में विजयी होती हैं तो सीएम चुनने के लिए विधायक दल की बैठक होगी और विधायको का बहुमत का आंकड़ा दिग्विजय सिंह के खेमे का रहेगा और दिग्विजय सिंह की ओर से अर्जुन सिंह के पुत्र व दिग्विजय सिंह के रिश्तेदार अजय सिंह को विधायक दल का नेता चुना जायेगा। इस प्रकार दोनो ही परिस्थितियों में कमलनाथ प्रदेश की राजनीति से विदाई लेंगे। प्रदेश कांग्रेस में कमलनाथ न घर के है न घाट के मध्यप्रदेश में कमलनाथ की राजनीति अब समाप्ति की औऱ ही है। आने वाला समय दिग्विजय सिंह के समर्थकों का बोलबाला रहेगा।
