दिलीप बोराना
मनासा रामपुरा में पिछले साल जैसी स्थिति नहीं बने। पहले से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हो। डूब क्षेत्र के ग़ांव को पहले से चिन्हित कर लिया जाए। ताकि अतिवृष्टि में समय रहते बचाव कार्य किए जा सके। यह कहना था विधायक अनिरूद्ध (माधव) मारू का। शनिवार को गांधीसागर में नीमच-मंदसौर एसपी कलेक्टर, जनप्रतिनिधी और जलसंसाधन विभाग की संयुक्त बैठक हुई।
बैठक में विधायक मारू ने सहभागिता की और आवश्यक सुझाव एवं दिशा निर्देश दिए।
विधायक मारू ने कहा डेम में लगे जनरेट अधिकांश पुराने है उन्हे बदलने की आवश्यकता है। केचमेंट एरिया में जहां भी बारिश हो रही है उसका आंकडा तत्काल विभाग के पास होना चाहिए ताकि समय रहते स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। डेम को क्षमता अनुसार भरा रहे इस बात का भी विशेष ध्यान रखे ताकि सिंचाई सुविधा का लाभ मिल सके। सीसी टीवी कैमरों से डेम की निगरानी होना चाहिए। डेम में लगे जनरेटर अधिकांश पुराने है उन्हे बदलने की आवश्यकता है। चम्बल डेवलपमेंट बोर्ड से क्या क्या कार्य किए जा रहे है इसमें कितनी राशि है हमारे क्षेत्र में इसका क्या उपयोग हो रहा है इसकी समिक्षा की जाना चाहिए।
सांसद सुधीर गुप्ता एवं गरोठ विधायक देवीलाल धाकड ने भी अपने सुझाव रखे।
इस दौरान मंदसौर कलेक्टर मनोज पुष्प, नीमच कलेक्टर जितेंद्रसिंह राजे, नीमच एसपी मनोज राय, मंदसौर एसपी सिद्धार्थ चैधरी सहित जलसंसाधन विभाग के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।
*पिछले साल जैसी स्थिति नहीं बने*
बांध में पानी की आवक ज्यादा है तो समय रहते गेट को खोला जाए ताकि पिछले साल जैसी स्थिति नहीं बने। रामपुरा में रिंगवाल क्षतिग्रस्त होने से पानी शहर में चला गया था ऐसी स्थिति इस साल ना बने इसका पूरा ध्यान रखा जाए। रिंगवाल की मेंटनेस का काम चल रहा है उसे शिघ्र पुरा कर लिया जाए। डुब क्षेत्र के गांव को पहले से चिन्हित कर लिया जाए ताकि अतिवृष्टि की स्थिति में समय पर नियंत्रण किया जा सके।
*मछुआरों को मिले सहायता*
मनासा विधानसभा अंतर्गत रामपुरा रिंगवाल जो गांधीसागर से जुडी है। हर साल करीब 3 हजार मछुुआरे मत्स्याखेट कर अपना भरण पोषण करते है। प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से करीब 10 हजार परिवार की रोजी रोटी चलती है लेकिन वर्ष 2019-20 में अतिवृष्टि एवं बाढ़ से मत्स्य पालन का काम देरी से शुरू हुआ। वहीं अतिवृष्टि से रामपुरा की रिंगवाल भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। इससे भी मछुआरों का काम प्रभावित हुआ। उक्त वक्त मच्छुआरो ने बाढ प्रभावितों को निकालने में भी शासन प्रशासन का सहयोग करा। कोरोेनो संकट काॅल में भी गांधीसागर से मतस्य पालन का काम 2 महीने से बंद पड़ा रहा। इससे मछुआरे आर्थिक संकट की स्थिति का सामना कर रहे है। अगर इन्हे कुछ आर्थिक मदद मिलती है। तो इन्हें संबंल प्रदान होगा।
