10 दिसंबर को हम मानव अधिकार दिवस मनाते हैं 60 साल से ज्यादा समय से हम इस दिन मानव अधिकार दिवस मना रहे हैं इस दिवस पर हम क्या ऐसा करने वाले हैं जो हमारे समाज और राष्ट्र को गौरवान्वित करेगा इन सब के पहले यह जानना अति आवश्यक है कि आखिर मानव अधिकार आयोग क्या है और क्यों इस दिवस को 10 दिसंबर के ही दिन मनाया जाता है दरअसल 10 दिसंबर 1948 को मानव अधिकार आयोग का गठन किया गया था यह एक ऐसी संस्थाएं जो विश्व में मानव के हित में किए जा रहा है अधिकारों की रक्षा करती हैं इसी के चलते मानव अधिकार आयोग ने मानव के अधिकार से जुड़े हुए अनुच्छेदो का लेखा-जोखा तैयार किया है जिसके अंतर्गत मानव के आर्थिक सामाजिक एवं राजनीतिक विकास में अवरोध उत्पन्न करने वाले मामलों पर या संज्ञान लिया जाता है या शिकायत के आधार पर समस्या को सुलझाया जाता है भारत में मानव अधिकार का मुख्य कार्यालय दिल्ली में है इसके अतिरिक्त प्रदेश जिले में भी मानव अधिकार के कार्यालय स्थापित किए गए हैं यह कार्यालय किसी सरकारी और गैर सरकारी अधिकारी के द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा करता है जिसके खिलाफ सरकार कोई कदम ना उठा रही हो और वह मामला मानव अधिकार के हनन के दायरे में आता हो ।मानवाधिकार मनुष्य के वे मूलभूत सार्वभोमिक अधिकार है जिन से मनुष्य को नस्ल जाती राष्ट्रीयता धर्म लिंग अधिक किसी भी दूसरे कारक के आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता सभी व्यक्तियों को गरिमा और अधिकारों के मामले में जन्मजात स्वतंत्रता और समानता प्राप्त है वास्तव में प्रत्येक व्यक्ति को ऐसे जीवन स्तर को प्राप्त करने का अधिकार है जो उसे और उसके परिवार के स्वास्थ्य कल्याण और विकास के लिए आवश्यक है मानव अधिकारों में आर्थिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों के समक्ष समानता का अधिकार है एवं शिक्षा का अधिकार आदि नागरिक और राजनीतिक अधिकार भी सम्मिलित है मानव अधिकार मानव के विशेष स्थिति के कारण उनसे संबंधित है इसलिए यह जन्म से ही प्राप्त है और इसकी प्राप्ति में जाति लिंग धर्म भाषा रंग तथा राष्ट्रीयता बाधक नहीं होती मानव अधिकारों को मूल अधिकार आधारभूत अधिकार अंतर्निहित अधिकार तथा नैसर्गिक अधिकार भी कहा जाता है मानव अधिकार की कोई सर्वमान्य विश्वव्यापी परिभाषा नहीं है इसलिए राष्ट्रीय की परिभाषा अपनी सुविधानुसार देते हैं विश्व के विकसित देश मानवाधिकार की परिभाषा को केवल मनुष्य के राजनीतिक तथा नागरिक अधिकारों को भी शामिल रखते हैं मानवाधिकारों को कानून के माध्यम से स्थापित किया जा सकता है इसका विस्तृत होता है जिसमें नागरिक राजनीतिक आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार भी आते हैं
संविधान में उल्लेख
आत्म सम्मान के साथ जीने के लिए अपने विकास के लिए और आगे बढ़ने के लिए कुछ हालात ऐसे चाहिए जिसमें कि उनके रास्ते में कोई व्यवधान ना आए पूरे विश्व में इस बात का अनुभव किया गया है कि इसलिए मानवीय मूल्यों की अवहेलना होने पर वे सक्रिय हो जाते हैं इसके लिए हमारे संविधान में भी उल्लेख किया गया है संविधान के अनुच्छेद 14 15 16 17 19 20 21 23 24 39 44 45 देश में मानवाधिकारों की रक्षा करने के सुनिश्चित है सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि इस दिशा में आयोग के अतिरिक्त कई एनजीओ भी काम कर रहे हैं और साथ ही कुछ समाजसेवी लोग भी इस दिशा में अकेले ही अपनी मुहिम चला रहे हैं 10 दिसंबर को पूरी दुनिया में मानवाधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र की साधारण सभा ने संयुक्त राष्ट्र की मानव अधिकारों की घोषणा को अंगीकृत किया गया मानवाधिकारों की घोषणा में 30 अनुच्छेद है
संविधान में नागरिकों के मौलिक अधिकार
भारत में नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़े तथ्य इस प्रकार हैं इससे संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान में लिया गया है इसका वर्णन संविधान के भाग 3 में (अनुच्छेद 12 से अनुच्छेद 35) है इसमें संशोधन हो सकता है और राष्ट्रीय आपात के दौरान (अनुच्छेद 352) जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को छोड़कर अन्य मौलिक अधिकारों को स्थगित किया जा सकता है मूल संविधान में सात मौलिक अधिकार थे लेकिन 44 वें संविधान संशोधन 1979 के द्वारा संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 31 से अनुच्छेद 19) को मौलिक अधिकार की सूची से हटा कर इसे संविधान के अनुच्छेद 300 ड्ड के अंतर्गत कानूनी अधिकार के रूप में रखा गया है।
*भारतीय नागरिकों के मूल अधिकार प्राप्त हैं*
समता या समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14 से अनुच्छेद 18) स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19 से 22) शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23 से 24) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25 से 28 )संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार (अनुच्छेद 29 से 30 )संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 32) मानव तथा नागरिकों के अधिकारों की घोषणा को अधिग्रहित किया गया।
संविधान में उल्लेख
आत्म सम्मान के साथ जीने के लिए अपने विकास के लिए और आगे बढ़ने के लिए कुछ हालात ऐसे चाहिए जिसमें कि उनके रास्ते में कोई व्यवधान ना आए पूरे विश्व में इस बात का अनुभव किया गया है कि इसलिए मानवीय मूल्यों की अवहेलना होने पर वे सक्रिय हो जाते हैं इसके लिए हमारे संविधान में भी उल्लेख किया गया है संविधान के अनुच्छेद 14 15 16 17 19 20 21 23 24 39 44 45 देश में मानवाधिकारों की रक्षा करने के सुनिश्चित है सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि इस दिशा में आयोग के अतिरिक्त कई एनजीओ भी काम कर रहे हैं और साथ ही कुछ समाजसेवी लोग भी इस दिशा में अकेले ही अपनी मुहिम चला रहे हैं 10 दिसंबर को पूरी दुनिया में मानवाधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र की साधारण सभा ने संयुक्त राष्ट्र की मानव अधिकारों की घोषणा को अंगीकृत किया गया मानवाधिकारों की घोषणा में 30 अनुच्छेद है
संविधान में नागरिकों के मौलिक अधिकार
भारत में नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़े तथ्य इस प्रकार हैं इससे संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान में लिया गया है इसका वर्णन संविधान के भाग 3 में (अनुच्छेद 12 से अनुच्छेद 35) है इसमें संशोधन हो सकता है और राष्ट्रीय आपात के दौरान (अनुच्छेद 352) जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को छोड़कर अन्य मौलिक अधिकारों को स्थगित किया जा सकता है मूल संविधान में सात मौलिक अधिकार थे लेकिन 44 वें संविधान संशोधन 1979 के द्वारा संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 31 से अनुच्छेद 19) को मौलिक अधिकार की सूची से हटा कर इसे संविधान के अनुच्छेद 300 ड्ड के अंतर्गत कानूनी अधिकार के रूप में रखा गया है।
*भारतीय नागरिकों के मूल अधिकार प्राप्त हैं*
समता या समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14 से अनुच्छेद 18) स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19 से 22) शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23 से 24) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25 से 28 )संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार (अनुच्छेद 29 से 30 )संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 32) मानव तथा नागरिकों के अधिकारों की घोषणा को अधिग्रहित किया गया।
