कुकड़ेश्वर ( नरेन्द्र कुमार चौधरी ) देश का सबसे बड़ा अब तक के लॉक डाउन विश्वव्यापी संक्रमित कोरोना महामारी वायरस के चलते सभी व्यापारी नगर व गांव के चौराहे की चर्चाओं में ज्ञात हुआ कि किस तरह से लॉक डाउन बढ़ता जा रहा है और आमजन परेशान हो रहा है आखिर इस सब के लिए क्या कोई जनप्रतिनिधि या शासन प्रशासन ध्यान देगा या ऐसे ही चलता रहेगा इसके लिए क्या जन चर्चा में सामने आया उक्त बात आज विश्वव्यापी महामारी कोरोना संक्रमित बीमारी के नाम से जो हर तबके के वर्ग वाले व्यक्तियों को व जनसमुदाय को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है छोटे से छोटा व्यापार-व्यवसाय से लगाकर बड़े व्यापारियों तक दिक्कत मुसीबतें माल सप्लाई में होती आ रही हैं इस सबके बीच जो बड़े व्यापारी हैं उनके कोई फर्क नहीं पड़ता जो होम डिलीवरी करने वाले हैं पर आज इस समय भारत में इतने लंबे समय का लोक डाउन लगाया जिसके चलते हर दिन मजदूरी रोजमरा का कार्य करने वाला व्यक्ति या फिर होटल पर कार्य कर कप प्लेट धोने वाला मजदूर आज इस स्थिति में अपने घर का पालन पोषण कैसे करें अपने परिवार को क्या सुख सुविधाएं दे यह एक बड़ी चुनौती बनकर गरीब असहाय मध्यम वर्गीय लोगों के लिए एक शासन प्रशासन का चैलेंज है घर में रहकर अपने हाथ ठेला छोटे से छोटा व्यवसाय कैसे अपना काम कर पाएगा कैसे अपना भरण-पोषण अपने परिवार का कर पाएगा इसके लिए बड़ा चिंतित विषय है और इन दिनों शासन प्रशासन के कान के नीचे जूं तक नहीं रेंग रही हैं जबकि पान मसाला बीड़ी तंबाकू सरकार द्वारा प्रतिबंध कर दिया गया है पर ₹5 की चीज ₹50 में धड़ल्ले से बिक रही हैं ₹15 का बीड़ी का बंडल जो कि ₹60 से ₹70 बिक रहा है मानो ऐसा लग रहा है की शायद कुछ लालाओ द्वारा कालाबाजारी कर अनाप-शनाप पैसे गरीब किसानों से या जिनको कहा जाए कि अन्नदाता ऐसे लोगों से वसूला जा रहा है क्योंकि बीड़ी तंबाकू कृषि मजदूरों या छोटे-छोटे कार्य करने वाले मजदूरों को ही आवश्यकता रहती हैं इनकी आदत सी हो गई या यू कहे की लत जो हो गई क्योंकि इनका एक सहारा है बीड़ी तंबाकू कार्य करते समय विश्राम करें बीड़ी के बहाने से तो इनका विश्राम भी होता है और इन को आराम भी पर आज यह बीड़ी इनके लिए एक मुंह मांगी कीमत बनकर चुपके चुपके खरीदना पढ़ रही हैं और लालाओं की कालाबाजारी थमने का नाम नहीं ले रही जबकि आज इस विषम परिस्थिति में शराब ठेकेदारों ने अपनी शराब की कीमत बढ़ा दी है पान मसाले वालों ने या फिर यूं कहें कि खाद्य सामग्री व्यापारियों ने अपने सामान की कीमत में बढ़ोतरी करी है पर आज किसान का स्वयं कमाया हुआ फसल जो अभी घरों में पड़ा है किसान अपनी फसल को मंडी बंद होने से बेच नहीं पा रहा है और पत्रक की आड़ में अगर बेचे तो उसे पर्याप्त पैसे नहीं मिल रहे हैं जिसके चलते किसानों को एक भयानक परिस्थिति का सामना करना पड़ रहा है अब बिना बेचे फसल को किसान अपना कर्ज कैसे दें या अपने घर परिवार को कैसे बिना खर्चे के चलाएं इस बात को लेकर किसान चिंतित हैं फिर भी किसान ने कभी अपनी फसल के लिए कोई मांग नहीं करी की अभी कोरोना लॉक डाउन हैं सभी ने अपनी अपनी सामग्री के पैसे बढ़ाएं पर हमें तो हमारा केवल जो हक हैं वही दिला दे मुंह मांगी कीमत नहीं हम किसान आज भी अपनी उपज गेहूं 16 सो रुपए बाजार मे व्यपरियो को देना पढ़ रहा है या किसी ने पंजियांन करवा रखा है वो किसान उन्नीस सौ रुपए तक सरकार में दे रहे हैं क्या वास्तविकता में कोरोना महामारी एक भयानक बीमारी हैं तो इसमें जिसका जहां डॉक्टरों का व लोगों का कहना है कि इलाज नहीं है वहां अभी तक मृत्यु दर देखे तो बहुत कम हैं और इससे ज्यादा तो वैसे ही कई बीमारियों से ग्रसित लोग अपनी जान गवा बैठे हैं क्या लोक डाउन का पालन कर घर में रहना ही इसका इलाज हैं या शक्ति के साथ इसका पालन क्यों नहीं कब तक घर मे पड़े रहेंगे लोग आज किराने की दुकानें नियमानुसार खुलती आ रही थी जो 7:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक का समय था उसमें सभी व्यापारी वर्ग व हर आदमी जिसको खाद्य सामग्री खरीदनी होती है जरूरत की चीजें लेनी होती है वह अपने नियम पर आकर अपना कार्य कर अपने घर वापस चले जाते हैं पर सरकार ने शासन प्रशासन ने होम डिलीवरी सिस्टम चालू किया जो छोटे नगर व गांव में नहीं चल सकता और वास्तविकता में यह चीज देखने को मिल भी रही हैं की सभी किराना व्यापारियों ने अपने-अपने दुकाने पूरी ओपन कर हर बार की तरह ही सामग्री बेच रहे हैं कोई होम डिलीवरी सिस्टम नहीं और कुछ जनों का कहना है कि जो टाइम था सुबह 7:00 से 12:00 बजे का वही सही हैं शासन-प्रशासन जनप्रतिनिधि इस बात का ध्यान दें कि यह समय सब्जी फल फ्रूट दूध अखबार व किराना सामग्री का सहयोग समय है जो अच्छा है दिन में तो वैसे भी पब्लिक बाहर नहीं निकलती क्योंकि अब गर्मी अपना असर दिखा रही हैं और लगातार लोग डाउन के चलते जिन क्षेत्रों में कोरोना पॉजिटिव नहीं है उन क्षेत्रों में उन नगर में किराना सामग्री के साथ साथ अन्य दुकानें हाथ ठेला जो जरूरत की सामग्री कपड़ा इलेक्ट्रिकल व जूते चप्पल नाई की कटिंग दाडी की दुकानें जो व्यक्ति केवल होटल व्यवसाय से जुड़ा हो चाय नाश्ता इनको भी रेगुलरी खुलवाना अति आवश्यक है क्योंकि आज इन लोगों के व्यवसाय लंबे समय से बंद हैं जिसके चलते अपने घर दुकान का बिजली बिल भरना घर परिवार में पैसा खर्च कर खाद्य सामग्री या छोटी मोटी बीमारी का इलाज करवाना आज एक दुख के साथ असहाय भी दिखाई दे रही है इसके लिए तो विचारनीय बात है जो व्यक्ति होटल पर अपने कप प्लेट धोकर अपना घर परिवार चलाता है उसके लिए प्रशासन या शासन क्या मदद कर रहा है धरातल पर उसे दुख ही मिल रहा वास्तविकता लोक डाउन इस महामारी का हल है तो अभी तक यह महामारी खत्म क्यों नहीं क्योंकि तीसरे चरण का लोग डाउन खत्म होने को हैं और चौथे की तैयारी हैं इससे आमजन को दुख परेशानियां जैसी कहीं दिक्कत सामने खड़ी हैं और इनसे लड़ने के लिए साथ ही शासन प्रशासन का डर जिसके चलते जनमानस बड़ा दुखी हैं अपना दर्द किसे बताएं क्या कौन सुनेगा जनमानस की आवाज को जबकि सोशल डिस्टेंस का पालन भी बराबर हो रहा है चाहे बैंक हो या किराने दुकान है या मेडिकल हर जगह जनता अपने आप के बचाव के साथ अपने वालों का बचाव भी करने के लिए लोक डाउन का पालन कर रही हैं इसी के साथ कुकड़ेश्वर नगर की जिला सहकारी मर्यादित सोसायटी जिसके सामने कड़ाके की धूप पर कोई छाँव के लिए टेंट जैसी व्यवस्था नहीं जिसके चलते जो व्यक्ति सोसायटी में अपने कृषि संबंधित कार्य के लिए आता है उसको या तो छांव में बैठने के लिए किसी के पास बैठना पड़ता है जिसके कारण सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं कर पा रहा है इस समस्या का भी दुख हो रहा है जनता को साथ ही पुलिस प्रशासन लगातार सोशल डिस्टेंस व घर में ही रहने के लिए सर्चिंग कर रही है तो स्वस्थ्य विभाग की पूरी टीम लगातार नगर व क्षेत्र के गाँवो मे घर घर जाकर हेल्थ स्क्रीनिंग का कार्य कर रहे वही समझाइश भी दे रहे हैं कि अतीआवश्यक कार्य हो तो ही बाहर आए वरना घर में ही सुरक्षित रहें और किसी को भी सर्दी खासी बुखार हो तो तुरंत इलाज करवाये शासकीय हॉस्पिटल जाकर साथ ही मास्क मुह पर लगाए रखे अपने हाथों को अच्छी तरह साबुन से बार बार धोये व सेनीटाइजर करते रहे
हर चौराहे की जनचर्चा है की नीमच जिला कलेक्टर महोदय आम जन के हित के लिए सोचे व सभी प्रकार की दुकाने सुबह 7 बजे से 12 बजे तक प्रति दिन खोलने का आदेश दे ताकि लॉक डाउन का पालन भी होगा और किसी को कोई परेशानी भी नही होगी आज दो माह का लॉक डाउन पुरा हो गया हर व्यापारी के घर की निजी दुकान नही लगभग सभी ने किराये से या पगड़ी पर पैसा खर्च कर ले रखी तो अब इन दुकान मालिको को किराया कहा से देंगे और बन्द दुकानों का बिल कैसे भर पाएंगे।
